मारवाड़ी बिज़नेस के 7 मूलमंत्र

                                                 मारवाड़ी बिज़नेस के  7  मूलमंत्र 


                 हिंदुस्तान में बिज़नेस का नाम आते ही लोगो के जेहन में सबसे पहला शब्द आता है " मारवाड़ी "। अपनी अद्भुत व्यापारिक समझबूझ , कुशल व्यवहार, कठिन परिश्रम, स्व -अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के चलते देश के व्यापार और उद्योग जगत में मारवाड़ी लोगो ने अपना  एक विशिष्ट स्थान  स्थापित किया है ! बिरला, मित्तल, बजाज, गोयनका, बांगर , अग्रवाल , सिंघानिया ,बियानी ,पोद्दार ,डालमिया ,रूइआ,ओसवाल ,पीरामल,मोरारका,जिंदल,मोदी,सोमानी,जैन, खेतान, सक्सेरिया, कासलीवाल  आदि मारवाड़ी परिवारों की लम्बी फेहरिस्त है, जिन्होंने अपने बिज़नेस में नए आयामो को छुआ है ! मारवाड़ी व्यापारियों ने न केवल परंपरागत बिज़नेस जैसे कपास ,मेटल,  सीमेंट,   केमिकल्स,   खाद,  पेपर, चाय , जूट  आदि में अपना अधिपत्य स्थापित किया है, बल्कि इन परिवारों की युवा पीढ़ी ने इ- कॉमर्स और टेक्नोलॉजी से सम्बंधित कंपनियों की सफलतापूर्वक  स्थापना कर के ये साबित कर दिया है की नयी किस्म की बिज़नेस में भी मारवाड़ियों का कोई सानी नहीं है !




कौन है मारवाड़ी ??

          मारवाड़ी शब्द  की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'मरुवत' से हुई है, मरू का मतलब है रेगिस्तान ! मारवाड़ी लोग, राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम भाग से जिसे शेखावाटी भी कहते है, से निकल कर देश के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचे थे ! राजस्थान के चूरू, झुंझुनू, बीकानेर, जोधपुर, सीकर , जैसलमेर आदि जिलों में  हमेशा अकाल का साया रहता था और कृषि या दूसरे व्यापार -धंधे की संभावनाएं लगभग नहीं होने के कारण, मारवाड़ी लोगो ने समय समय पर अपने क्षेत्र से पलायन करके देश के दूसरे हिस्सों में अपना ठिकाना बनाया !

                         मारवाड़ी लोगो में मुख्यता माहेश्वरी , जैन, खंडेलवाल, अग्रवाल जिन्हे बनिया भी कहा जाता है, ने  कोलकाता , कानपूर, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई , नागपुर, रायपुर, इंदौर बैंगलोर, चेन्नई, गौहाटी   आदि शहरो में  जाकर , कठिन परिस्तिथियों में  अपने संघर्ष गाथा  की शुरुआत की ! मुग़ल बादशाह अकबर के दौर में वर्ष  1564 में सबसे पहले कुछ लोगो ने  पलायन करके बंगाल में बसने की शुरुआत की थी और बाद में ये सिलसिला जारी रहा !

क्या है सफलता के मूलमंत्र ?



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                            आखिर वो क्या वजहें है की पिछले लगभग 200  सालो से मारवाड़ी परिवारों का बिज़नेस में दबदबा रहा तथा  उदारीकरण और वैश्वीकरण की आंधी में भी अपने बिज़नेस पर मज़बूत पकड़ बनायें रखीं है ? यहाँ बिज़नेस के 7  मूल मंत्र प्रस्तुत है, जिसके बलबूते मारवाड़ी अपना बिज़नेस साम्राज्य खड़ा करने में सफल हुए !

1.पैसे और निवेश का सही प्रबंधन: मारवाड़ी बिज़नेस के सफल होने का प्रमुख कारण है , पैसे और निवेश का सही प्रबंधन। परिवार के मुखिया का पूरा नियंत्रण  व्यापार में होने वाले खर्चे, लागत और  मुनाफे पर होता है ! परिवार के मुखिया की अनुमति के बिना कोई भी वित्तीय फैसला लेना मुमकिन नहीं होता है ! मितव्यता और वित्तीय अनुशासन, किसी भी बिज़नेस की सफलता के केंद्र बिंदु है ! मारवाड़ी न केवल अपने एक एक पैसे का हिसाब रखते है बल्कि  व्यापार में होने वाले खर्चे को कम करने का पूरा ध्यान रखते है ! 




             मारवाड़ी परिवारों की यही खूबी, उन्हें कठिन बिज़नेस परिस्थितियों में भी लम्बे समय तक लड़ने का सामर्थ्य प्रदान करती है ! कम शिक्षित होने के बावजूद मारवाड़ी ,हिसाब के मामले में बहुत कुशल है  है और "पहले लिख, पीछे दे, भूल पड़े कागज़ से ले “ की निति पर काम करते है !

2.छोटे स्तर से शुरुआत:    मारवाड़ी लोग सामान्यतया चकाचोंध से दूर रहते हुए अपने बिज़नेस को बहुत छोटे से शुरू करने में सोचते नहीं है  ! कम पूंजी और संसाधन का अभाव भी मारवाड़ी लोगो के बिज़नेस के  ज़ज़्बे को रोक नहीं सकते है ! छोटे से बिज़नेस की शुरुआत  करके अपनी मेहनत और लगन से उसको आगे बढ़ाते है ! 





आज जहाँ मॉल और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रिटेल स्टोर्स अपने बिज़नेस को  बढाने  में संघर्ष कर रहे है, वहीं मारवाड़ी किराना स्टोर्स अपनी बेहतरीन सेवाएं देकर अपने बिज़नेस का तेजी से विस्तार कर रहे है ! मारवाड़ी लोग अपना सारा ध्यान बिज़नेस के ऊपर केंद्रित रखते है !

.विपरीत परिस्तिथियों में सामंजस्य   : मारवाड़ी लोगो का एक सबसे बड़ा गुण है, परिस्थितियों और माहौल  के हिसाब से अपने आप को ढालना ! राजस्थान के छोटे गावों और शहरो से निकलकर मारवाड़ी देश के हर कोने तक पहुंचे और वहां अनजान लोगो और विपरीत वातावरण में अपने व्यापार की शुरूआत की ! 
               नयी जगहों पर जाकर मारवाड़ियों ने अपने मधुर व्यवहार से स्थानीय लोगो के बीच अपनी जगह बनायीं और  स्थानीय भाषा, तौर तरीके और जीवन शैली अपनायी ! चेन्नई और बैंगलोर में जाकर मारवाड़ी उतनी ही धाराप्रवाह तमिल और कन्नड़ बोलते है, जितनी की स्थानीय लोग ! शांत स्वभाव, धार्मिक संस्कारो और साधारण जीवन शैली के चलते, मारवाड़ी प्रायः किसी भी तरह के विवाद से भी बचते है !

4.जीवन मूल्यों की शिक्षा : मारवाड़ी परिवारों में बचपन से ही  व्यापार की शिक्षा के साथ साथ जीवन मूल्यों और संस्कार की शिक्षा देने का चलन रहा है ! व्यापार में विश्वश्नीयता, नैतिकता, मितव्यता, धैर्य, मेहनत  और टीम वर्क के महत्व का प्रशिक्षण दिया जाता है ! बचपन से ही पैसे की महत्ता को समझाया जाता है !




                       
श्री घनश्यामदास बिरला ने अपने पुत्र श्री बसंत कुमार बिरला के नाम जो पत्र लिखा था वो सब लोगो को पढ़ना चाहिए, वो अपने पुत्र को लिखते है की "धन का कभी मौज-शौक में उपयोग मत करना , ऐसा नहीं की धन हर समय साथ रहेगा ही,इसीलिए जितने दिन पास में  है उसका उपयोग सेवा के लिए करो , अपने ऊपर कम से कम खर्च  करो ,बाकी  जनकल्याण और दुखियो के  दुःख दूर करने में व्यय करो !"

5. संयुक्त परिवार की परंपरा : मारवाड़ी परिवारों में सामान्य तौर में संयुक्त परिवारों में रहने की परंपरा रही है ! आज के दौर में शायद संयुक्त परिवारों की संख्या  घट रही हो किन्तु पहले घर में  25-30  सदस्यों का एक साथ रहना और एक ही रसोई में भोजन बनाना, सामान्य बात थी ! 


                
       घर के मुखिया की अनुमति के बिना कोई भी फैसला लेना मुमकिन नहीं था  घर के हर सदस्य को खर्चे का हिसाब देना जरूरी होता था ! परिवार के हर  पुरुष सदस्यों को व्यापार -धंधे में अपना पूरा समय देना पड़ता है ! बड़ों को सम्मान देने की परम्परा है और मारवाड़ी उद्योगपति को बोर्ड मीटिंग में भी अपने से बुजुर्ग के पांव छूते हुए देखा जा सकता है ! अपने यहाँ  काम करने वाले कर्मचारियों को भी परिवार के सदस्यों की तरह ही रखा जाता है!


6 राष्ट्र प्रेम का जज़्बा :  मारवाड़ी धनाढ्यों ने जहाँ अपनी मेहनत, बुद्धि-कौशल और विवेक से धन अर्जित किया है और जब भी देश को धन की जरूरत हुई है तो अपने ख़ज़ाने ख़ाली करने में किसी भी तरह का सोच विचार नही किया !









                                 


                                                                        
                                                                                                                            
उद्योगपति श्री घनश्याम दास बिरला और श्री जमनालाल बजाज का भारत की स्वत्रंतता आंदोलन में योगदान किसी से छुपा हुआ नहीं है ! श्री जमनालाल बजाज ने नागपुर के पास वर्धा में अपनी ज़मीन महात्मा गाँधी को सौंप दी और वहाँ पर सेवाग्राम बनाया गया जो भारत की स्वंत्रता संग्राम का केंद्र बिंदू रहा ! श्री रामनाथ गोयनका, श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार, श्री अमरचंद बांठिया, श्री गुर्जरमल मोदी  का देश की स्वत्रंता में सराहनीय योगदान रहा है !

7.सामाजिक सरोकार :  मारवाड़ी समुदाय अपने पैसे को समाजोपयोगी कार्यो  में खर्च करने के लिए जानी जाती  है ! खुद के सिमित शिक्षित होने के बावजूद मारवाड़ियों ने देश में  उच्च शिक्षा और तकनीक  के कई विश्व स्तरीय संस्थान खोले । बिरला  इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी , पिलानी  ( बिरला परिवार ), गोविंदराम सक्सेरिया इंस्टिट्यूट ऑफ़  टेक्नोलॉजी एंड साइंस, इंदौर ( सक्सेरिया परिवार), एम् बी एम् इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर  ( बांगर परिवार  ), विद्या भवन, उदयपुर ( सक्सेरिया परिवार ), जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, मुंबई ( बजाज परिवार  ), अशोक हॉल, कोलकाता (बिरला परिवार )  आदि संस्थान अपनी  बेहतरीन शिक्षा प्रणाली के लिए विख्यात है ! 



एम्. बी. एम्. इंजीनियरिंग कॉलेज,जोधपुर                     

                                                                                                                                                                               
                      शिक्षा संस्थानों के अलावा  मारवाड़ियों द्वारा बनायीं गयी धर्मशालाएँ, मंदिर और सामुदायिक भवन देश के लगभग हर शहर में मौजूद है और समाज के हर वर्ग के उपयोग के  लिए उपलब्ध है ! देश में जब भी कोई बाढ़, भूकंप , अकाल जैसी आपदा आई है , मारवाड़ियों ने समय- समय पर तन-मन-धन से अपना योगदान दिया है !


कुछ प्रसिद्ध  मारवाड़ी कंपनिया:









बजाज ग्रुप (बजाज ऑटो ,बजाज फिनसर्व , बजाज इलेक्ट्रिकल्स )











आर्सेलर मित्तल स्टील ग्रुप  ( मित्तल स्टील, इस्पात इंडस्ट्रीज )








वेदांता रिसोर्सेस लिमिटेड:  ( कैर्न एनर्जी, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, भारत एल्युमीनियम कंपनी, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज  )









दमानी ग्रुप:  ( डी-मार्ट - श्री राधाकृष्ण दमानी, फोर्बेस मैगज़ीन के हिसाब से भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति है !)










आदित्य बिरला ग्रुप : ( हिंडालको, आदित्य सीमेंट,  इंडो-गल्फ फर्टीलिज़ेर्स, बिरला कॉपर, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अल्ट्रा टेक सीमेंट , आईडिया सेलुलर )

















बांगर ग्रुप :( श्री सीमेंट, बांगर सीमेंट  )











सिंघानिया ग्रुप : ( जे के सीमेंट , रेमंड्स , जे के टायर्स, जे के पेपर  )

फ्यूचर रिटेल: ( बिग बाजार , पेंटालून रिटेल )







पीरामल ग्रुप: ( पीरामल इंटरप्राइजेज, पीरामल ग्लास, पीरामल रियलिटी )















गोयनका ग्रुप ( सीऐट टायर्स, आरपीजी लाइफ साइंसेज, केइसी इंटरनेशनल , जेनसार टेक्नोलॉजी, वेलस्पन टेक्सटाइल )










सोमानी ग्रुप: ( थायसेनक्रूप,  उधे इंडिया )








खेतान ग्रुप : (मेक्नाली भारत , रेडिको खेतान )












जिंदल ग्रुप :( JSW एनर्जी, जिंदल स्टील एंड पावर )











पोद्दार ग्रुप :( चम्बल फर्टिलाइज़र्स  , बालकृष्ण टायर्स, जुआरी एग्रो, सियाराम सिल्क्स  )










डालमिया ग्रुप :( गुजरात हैवी केमिकल्स लिमिटेड, डालमिया सीमेंट )



प्रसिद्ध मारवाड़ी  ई -कॉमर्स एवं टेक्नोलॉजी कंपनी :










रोहित बंसल एवं बिन्नी बंसल ( फ्लिपकार्ट )








रितेश अग्रवाल ( ओयो होटल्स )









भाविश अग्रवाल (ओला कैब्स )












पीयूष बंसल (लेंसकार्ट )













दीपेंदर  गोयल ( जोमेटो )


आशीष गोयल (अर्बन लैडर )

मैनेजमेंट मंत्र : अनुशासन , रिस्क लेने की क्षमता और कठिन परिश्रम के बिना बिज़नेस में सफलता पाना असंभव है ! मारवाड़ी बिज़नेस लीडर्स के जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है और उसे अपने बिज़नेस में लागु कर सकते है ! आप सब  गीता पीरामल की पुस्तक " बिज़नेस महाराजा" पढ़ सकते है, जिसमे 8  बिज़नेस व्यक्तित्व का प्रोफाइल दिया गया है !


नितेश कटारिया, पुणे : लेखक,  मोटिवेशनल स्पीकर, ब्लॉग राइटर और मार्केटिंग प्रोफेशनल है और 9822912811  या niteshk3@yahoo.com  पर पंहुचा जा सकता है ! 





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